Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 99, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 99, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 99 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
आह्लादमात्रे सौम्यत्वं सुखतश्चेन्द्रकीटयोः ।
समं विकल्पविन्मुक्तं विकल्पस्त्वनतिक्रमः ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि मन विकल्प-ज्ञान से शून्य हो तो आह्वादस्वरूप आत्मानन्द में और भोजन,
निद्रा, मैथुन आदि से होने वाले सुखों में इन्द्र और कीड़े की मन की प्रसन्नतारूप सौम्यता एक सी
है। केवल विकल्प ही दोनों के लिए-इन्द्र और कीड़े के लिए-हिमालय के समान अलंघ्य है