Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 99, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 99, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 99 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
रागद्वेषभयाहारमैथुनोत्थं सुखासुखम् ।
तिरश्चां जन्ममृत्यादिखेदः कश्चिन्न भिद्यते ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
राग, द्वेष, भय, आहार और स्त्रीसंगजनित सुख और दुःख तथा जन्म-मरण के समय होनेवाला
क्लेश इन्द्र और कीड़े का समान है, उसमें तनिक भी अन्तर नहीं है