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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 99, Verse 23

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 99, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 99 · श्लोक 23

संस्कृत श्लोक

अखण्डचित्ता शैलादिसत्ता निद्रा च भूरुहाम् । द्वैतोपलम्भमुक्तत्वात्खमेवैकमतो जगत् ॥ २३ ॥

हिन्दी अर्थ

जो पर्वत आदि की सत्ता और जो वृक्षों की निद्रा है, वह द्वैतज्ञानविहीन होने के कारण अखण्ड चिद्रूप ही है, इसलिए उनकी दृष्टि से जगत्‌ एक अज्ञानउपहित चिन्मात्र ही है