Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 99, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 99, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 99 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
परिज्ञातं जगद्यावदपरिज्ञानसंयुतम् ।
न त्वं नाहं न चैवास्तिनास्ती न च भविष्यति ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
औरों की दृष्टि से भी आत्मतत्त्व जब तक परिज्ञात न हो तभी
तक जगत् है आत्मतत्व का परिज्ञान होने पर तो न तुम हो, न मैं हूँ, न जगतूसत्ता ही है, न असत्ता
है ओर न जगत् का प्रागभाव ही है यानी किसी कोटि में जगत् की स्थिति नहीं है