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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 99, Verse 26

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 99, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 99 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

पूर्वं सर्गाद्यथैवासीत्तथैवैकं समस्थितम् । भविष्यत्यधुनानन्तकालमेवं तथैव च ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

पररमार्थद्रष्टि से तो सद्‌ ही एकरूप है, यह कहते हैं / सृष्टि के पहले सृष्टि आदि जगत्‌ जैसे एकरूप ही स्थित था, वर्तमान काल में भी वैसे ही स्थित है ओर आगे भी अनन्त काल तक वैसे ही स्थित रहेगा