Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 99, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 99, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 99 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
त्वं यथास्थितमेवास्व यथास्थितमहं स्थितः ।
सुखासुखे पराकाशे शान्ते नेहास्ति किंचन ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
आप अपने स्वरूप में ही स्थित रहिये, मैं भी अपने स्वरूप
में ही स्थित हूँ, परम आकाश में सुख और दुःख का नाम नहीं है और पराकाश (ब्रह्मप्रकाश) के
सिवा यहाँ कुछ नहीं है