Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 99, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 99, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 99 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
परमाकाशतां मुक्त्वा किं स्वप्ननगरे वद ।
विद्यते किल तच्छान्तं चिद्व्योमाच्छमनामयम् ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
जरा बतलाइये तो सही स्वप्न नगर में परमाकाशता को छोड़कर
क्या है ? निर्मल, निर्विकार शान्त चिदाकाश ही तो स्वप्ननगर है