Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 99, Verse 33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 99, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 99 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
यन्न किंचित्प्रबोधोऽस्ति नाप्रबोधोऽस्ति तत्क्वचित् ।
यस्तूपलम्भस्तत्काले पूर्वावस्थैव सा तथा ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस वस्तु की प्रबोधअवस्था में कुछ भी सत्ता नहीं है वह अबोधावस्था
में भी कहींपर नहीं हे । जो अप्रबोधअवस्था में उसकी प्रतीति होती है, वह अज्ञता ही है अर्थात्
अज्ञान ही उसकी प्रतीति के रूप से प्रसिद्ध होता है