Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 99, Verse 44
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 99, verse 44 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 99 · श्लोक 44
संस्कृत श्लोक
मुकुरेऽन्तर्यथा बिम्बाद्विम्बं भाति जगत्तथा ।
चिद्व्योमनि स्वतो भातमबिम्बादेव बिम्बितम् ॥ ४४ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे दर्पण में निमित्तभूत बाहरी
बिम्ब से भीतर प्रतिबिम्ब की प्रतीति होती है वैसे ही निमित्तभूत प्रतिविम्ब के विना ही अपने आप
चिदाकाश में प्रतिबिम्बत जगत् प्रतीत होता है