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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 99, Verse 45

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 99, verse 45 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 99 · श्लोक 45

संस्कृत श्लोक

मुकुरेऽन्तर्यथा बिम्बं न दृष्टमपि किंचन । तथा चिद्व्योमगं विश्वं न दृष्टमपि किंचन ॥ ४५ ॥

हिन्दी अर्थ

दर्पण के दरष्टान्त से विवक्षित अश को कहते हैं / जैसे दर्पण के अन्दर दिख रहा भी बिम्ब वास्तव में कुछ नहीं है वैसे ही चिदाकाश में प्रतीत हो रहा भी विश्व परमार्थ दृष्टि में कुछ भी नहीं है