Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 99, Verse 46
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 99, verse 46 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 99 · श्लोक 46
संस्कृत श्लोक
लभ्यते यद्विचारेण यत्सकारणकं स्थितम् ।
तत्सच्छेषं तु भामात्रमभूतं सत्कथं भवेत् ॥ ४६ ॥
हिन्दी अर्थ
जो वस्तु शास्त्रीय विचार से प्राप्त होती है
जिसकी स्थिति प्रमाणरूप कसौटी से प्रमाणित है वही सत् है उससे अन्य तो प्रतिभासमात्र है, वह
तीनों कालों में सत्ताशून्य है - न भूतकाल में था, न वर्तमान में है और न भविष्यत् में होगा भला
वह सत् कैसे हो सकता है ?