Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 99, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 99, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 99 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
अयं सोहमिदं तन्म इत्याकल्पितकल्पनम् ।
जगद्यथा नृणां स्फारं तथैवोच्चैर्गुणैः कृमेः ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
देह में ओर देह भोग्य वस्तुओं में अहंताममता का अभ्यात्त मनुष्य और कृमि दोनों को एक सा
हैं, यह कहते हैं /
श्रीरामजी, यह, वह, मैं, यह मेरा है, वह मेरा है, इस तरह कल्पित अध्यासरूप जगत्
जैसे मनुष्यों के लिए अनेक ऊँचे गुणों के कारण अत्यन्त आस्था का भाजन है, ठीक वैसे ही
कृमि के लिए भी है