Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 99, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 99, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 99 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
त्रसरेणुप्रमाणात्मा कृम्यणुस्तिमिनामकः ।
गमने व्यग्रता तस्य गरुडस्येव लक्ष्यते ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, यह एक और नवीनता सुनिये-तिमिनाम
का जो अत्यन्त छोटा त्रसरेणु के बराबर का जीव है, उसकी गमन में ऐसी व्यग्रता दीखती है, जैसी
कि गरुड़ की गमन में व्यग्रता दीखती हो