Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 13, Verses 2–3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 13, verses 2–3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 2,3
संस्कृत श्लोक
उल्लासबहुलानन्तकल्लोलानलमाकुलान् ।
जडान्प्रवहति स्फारान्प्रावृषीव तरङ्गिणी ॥ २ ॥
चिन्तादुहितरो बह्वयो भूरिदुर्ललितैधिताः ।
चञ्चलाः प्रभवन्त्यस्यास्तरङ्गाः सरितो यथा ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
विविध दुश्चेष्टाओं द्वारा उनकी वृद्धि होती हे