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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 15, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 15, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 15 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

यानि दुःखानि दीर्घाणि विषमाणि महान्ति च । अहंकारात्प्रसूतानि तान्यगात्खदिरा इव ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे पर्वत से खैर के वृक्षों की उत्पत्ति होती है, वैसे ही संसार में जितने चिरकाल स्थायी भीषण महादुःख हैं, उनकी उत्पत्ति अहंकार से ही हुई है