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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 17, Verse 24

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 17, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 17 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

जराकुसुमितारूढा पातोत्पातफलावलिः । संसारजंगले दीर्घे तृष्णा विषलता तता ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

संसाररूप विशाल जंगल में जरा, मरण आदि विकसित कुसुमं से युक्त एवं विनिपात और उत्पात आदि फलों की जननी तृष्णा विस्तृत विष लता है