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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 17, Verse 3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 17, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 17 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

मम चित्तमहारण्येव्यामोहतिमिराकुले । शून्ये ताण्डविनी जाता भृशमाशापिशाचिका ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

व्यामोहरूप अन्धकार से व्याप्त विचारशून्य मेरे चित्तरूपी बड़े जंगल में ताण्डव -नृत्य करनेवाली आशारूपी पिशाचिकाका जोर-शोर से उदय हुआ हे