Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 17, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 17, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 17 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

उद्दामकल्लोलरवा देहाद्रौ वहतीह मे । तरङ्गतरलाकारा तरत्तृष्णातरङ्गिणी ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

बढ़े हुए अधिक्षेप, अनृप भाषण आदिरूप प्रचण्ड कल्लोल शब्दों से युक्त अतएव उक्त तरगों से तरल आकारवाली ओर एक विषय से दूसरे विषय की ओर जानेवाली तृष्णारूपी नदी मेरे शरीररूपी पर्वत में बह रही है