Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 18, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 18, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
जडाजडदृशोर्मध्ये दोलायितदुराशयः ।
अविवेकी विमूढात्मा मोहमेव प्रयच्छति ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
चंचल एवं अशुद्ध चित्तवाला है