Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 18, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 18, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
स्तोकेनानन्दमायाति स्तोकेनायाति खेदिताम् ।
नास्ति देहसमः शोच्यो नीचो गुणबहिष्कृतः ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
यह शरीर अल्प खाने-पीने से आनन्द को प्राप्त होता है ओर अल्प
शीत-उष्ण आदि के क्लेशको प्राप्त होता है, इसलिए शरीर के समान गुणहीन, शोचनीय (शोक करने
योग्य) ओर अधम दूसरा कोई नहीं हे