Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 19, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 19, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
ये दोषा ये दुराचारा दुष्क्रमा ये दुराधयः ।
ते सर्वे संस्थिता बाल्ये दुर्गर्त इव कौशिकाः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे उल्लू दिन में अन्धकारमय गड़ढों में छिपे रहते हैं, वैसे ही जितने दोष, जितने दुराचार, जितने
दुष्कर्म और जितनी मानसिक चिन्ता हैं, वे सब बाल्यावस्था में जीव के हृदय में छिपकर बैठे रहते
हैं