Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 20, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 20, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 20 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
सर्वस्याग्रे सर्वपुंसः क्षणमात्रमनोहरम् ।
गन्धर्वनगरप्रख्यं यौवनं मे न रोचते ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
यौवन एक क्षणभर के लिए सुन्दर प्रतीत होनेवाली सम्पूर्ण वस्तुओं में, गन्धर्वनगर (=) के सदुश,
(॥)) जिसे गन्धर्वनगर दिखाई देता है उसकी मृत्यु हो जाती है । इससे गन्धर्वनगर का दर्शन
मरण का चिह्न है, यह सिद्ध है । इसलिए गन्धर्वनगर के पक्ष में "सम्पूर्ण आयु के अन्त में” ऐसा अर्थ
करना चाहिए |
सर्वश्रेष्ठ है ओर सभी लोगों को क्षणमात्र के लिए अच्छा लगता है, इसलिए यह मुझे अच्छा नहीं
लगता