Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 20, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 20, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 20 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
दिनानि कतिचिद्येयं फलिता देहजङ्गले ।
युवता शरदस्यां हि न समाश्वासमर्हथ ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
जो यह युवावस्था है, यह देहरूपी जंगल में कुछ दिनों के लिए फली-
फूली शरद्तऋतु है, यह शीघ्र ही क्षय को प्राप्त हो जायेगी अतएव इस पर आप लोगों को विश्वास नहीं
करना चाहिए । (भगवान् श्रीरामचन्द्रजी का अपने अनुचरो के प्रति यह कथन है)