Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 20, Verse 36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 20, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 20 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
यदा यदा परां कोटिमध्यारोहति यौवनम् ।
वल्गन्ति सज्वराः कामास्तदा नाशाय केवलम् ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
जब यौवन अपनी चरम सीमा में
आरूढ हो जाता है, तब केवल नाश के लिए ही सन्तापयुक्त कामनाएँ वृद्धि को प्राप्त होती है