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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 21, Verses 5–6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 21, verses 5–6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 5,6

संस्कृत श्लोक

मेरुश्रृंगतटोल्लासिगंगाजलरयोपमा । दृष्टा यस्मिन्स्तने मुक्ताहारस्योल्लासशालिता ॥ ५ ॥ श्मशानेषु दिगन्तेषु स एव ललनास्तनः । श्वभिरास्वाद्यते काले लघुपिण्ड इवान्धसः ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

जिस स्तनमण्डल पर सुमेरु पर्वत के शिखर से बहनेवाले गंगाजल के प्रवाह के सदुश मोतियों के हार की शोभा देखी गई थी ओर देखी जाती है, वही स्त्रीस्तन समय पाकर शीघ्र श्मशान-भूमि में एवं ग्राम ओर नगर से दूर निर्जन स्थानों में भात के छोटे पिण्ड के समान कुत्तों का ग्रास बनता है