Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 22, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 22, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 22 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
कर्तव्यं किं मया कष्टं परत्रेत्यतिदारुणम् ।
अप्रतीकारयोग्यं हि वर्धते वार्धके भयम् ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
खेद है, परलोक में मैं क्या करूँगा, इस प्रकार का
अतिभीषण भय, जिसका कोई प्रतीकार नहीं हो सकता, वृद्धावस्था में बढ़ता जाता है