Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 23, Verse 42
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 23, verse 42 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
तारुण्यनलिनीसोम आयुर्मातङ्गकेसरी ।
न तदस्ति न यस्यायं तुच्छातुच्छस्य तस्करः ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
यह काल यौवनरूपी कमलिनी के लिए चन्द्रमारूप ओर आयुरूपी गज के लिए
सिंहस्वरूप है। इस संसार में अत्यन्त तुच्छ या महान् ऐसी कोई वस्तु नहीं है, जिसका कि यह काल
नाश न करता हो