Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 25, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 25, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 25 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
नृत्यतो हि कृतान्तस्य नितान्तमिव रागिणः ।
नित्यं नियतिकान्तायां मुने परमकामिता ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
किये हुए कर्मों के फल की अवश्यम्भावितारूप
नियम में बड़ा अनुराग है। यह किये हुए कर्मों का फल (& ) अवश्य देता है, यह भाव है