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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 5, Verse 10

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 5, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 5 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

तथा तेषु तनूजेषु खेदवत्सु कृशेषु च । सपत्नीको महीपालश्चिन्ताविवशतां ययौ ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

सभी पुत्रों को दुःखी ओर कृश देखकर रानियों के साथ महाराज दशरथ को बड़ी चिन्ता हुई