Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 5, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 5, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 5 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
एवंगुणविशिष्टं तं रामं गुणगणाकरम् ।
आलोक्य भ्रातरावस्य तामेवाययतुर्दशाम् ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
विविध गुणों के आगार श्रीरामचन्द्रजी को पूर्वोक्त चिन्ता आदि से युक्त देखकर उनके भाई
लक्ष्मण और शत्रुघ्न भी उसी अवस्था को प्राप्त हुए