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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 5, Verse 11

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 5, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 5 · श्लोक 11

संस्कृत श्लोक

का ते पुत्र घना चिन्तेत्येवं रामं पुनः पुनः । अपृच्छत्स्निग्धया वाचा नैवाकथयदस्य सः ॥ ११ ॥

हिन्दी अर्थ

हे भरद्वाज, महाराज "पुत्र, तुम्हें कौन- सी बड़ी चिन्ता है” इस प्रकार बड़ी मधुर वाणी से बार बार पूछते थे, परन्तु रामचन्द्रजी उनको कुछ भी नहीं बताते थे