Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 5, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 5, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 5 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
न किंचित्तात मे दुःखमित्युक्त्वा पितुरङ्कगः ।
रामो राजीवपत्राक्षस्तूष्णीमेव स्म तिष्ठति ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
पिताजी, मुझे कुछ भी दुःख नहीं है, - यह कहकर कमलनयन श्रीरामचन्द्रजी
पिताजी की गोद में जाकर चुपचाप बैठ जाते थे