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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 5, Verse 13

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 5, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 5 · श्लोक 13

संस्कृत श्लोक

ततो दशरथो राजा रामः किं खेदवानिति । अपृच्छत्सर्वकार्यज्ञं वसिष्ठं वदतां वरम् ॥ १३ ॥

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर महाराज दशरथ ने 'राम किसलिए खिन्न है" यह वक्ताओं में श्रेष्ठ तथा सम्पूर्ण कार्यो के ज्ञाता श्रीवसिष्ठजी से पूछा