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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 5, Verse 14

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 5, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 5 · श्लोक 14

संस्कृत श्लोक

इत्युक्तश्चिन्तयित्वा स वसिष्ठमुनिना नृपः । अस्त्यत्र कारणं श्रीमन्मा राजन्दुःखमस्तु ते ॥ १४ ॥

हिन्दी अर्थ

दशरथजी के यों पूछने पर विचार कर महर्षि वसिष्ठजी ने राजा से कहा : राजन्‌, इसमें कुछ कारण है, पर श्रीमन्‌, आप दुःखी न हों