Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 6, Verse 42
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 6, verse 42 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 6 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
यथा हर्षो नभोगत्या मृतस्य पुनरागमात् ।
तथा त्वदागमाद्ब्रह्मन्स्वागतं ते महामुने ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
ब्रह्मन्, स्थलचर मनुष्य आदिको आकाश में उड़ने से जैसा आनन्द होता है, और मृत पुरुष के
पुनः वापिस आ जाने से उसके बान्धवो को जैसा आनन्द होता हे वैसे ही आपके आगमन से हमें आनन्द
हो रहा है, आपका स्वागत हो