Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 7, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 7, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 7 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
रामस्य राजशार्दूल सहिष्यन्ते न सायकान् ।
अनारतगता धारा जलदस्येव पांसवः ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज, जैसे मेघ की मुसलाधार वृष्टि को धूलि कण नहीं सह सकते, वैसे ही
श्रीरामचन्द्रजी की बाणवृष्टि को राक्षस नहीं सह सकेंगे