Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 7, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 7, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 7 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
यत्तु मे हृद्गतं वाक्यं तस्य कार्यविनिर्णयम् ।
कुरु त्वं राजशार्दूल धर्मं समनुपालय ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज, मैं जो कहना चाहता हूँ, उसके विषय मेँ आप कर्तव्य का निश्चय कीजिए और धर्म
का परिपालन कीजिए