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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 7, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 7, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 7 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

अहं धर्मं समातिष्ठे सिद्धयर्थं पुरुषर्षभ । तस्य विघ्नकरा घोरा राक्षसा मम संस्थिताः ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

पुरुषश्रेष्ठ, में सिद्धिलाभ के लिए यज्ञ आरम्भ करता हूँ । भीषण राक्षस मेरे यज्ञ में विघ्न करने के लिए आ जाते हैँ