Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 8, Verses 32–34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 8, verses 32–34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 8 · श्लोक 32,33
संस्कृत श्लोक
देवदानवगन्धर्वा यक्षाः पतगपन्नगाः ।
न शक्ता रावणं योद्धुं किं पुनः पुरुषा युधि ॥ ३२ ॥
महावीर्यवतां वीर्यमादत्ते युधि राक्षसः ।
तेन सार्धं न शक्ताः स्म संयुगे तस्य बालकैः ॥ ३३ ॥
अयमन्यतमः कालः पेलवीकृतसज्जनः ।
राघवोऽपि गतो दैन्यं यतो वार्धकजर्जरः ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
आपको ऐसा अधैर्य केसे हुआ ? इस प्रश्न पर कहते हैं।
देवता, दैत्य, गन्धर्व, यक्ष, पक्षी, नाग ये सब रावण से लड़ने के लिए असमर्थ हैं, मनुष्यों की तो
बात ही क्या है ? रावण बड़े बलशालियों के बल को भी युद्ध में हर लेता है, उसके साथ संग्राम में लड़ने
के लिए हम समर्थ नहीं हैं । उसके पुत्र इन्द्रजित् आदि के साथ भी हम नहीं लड़ सकते अथवा ऐसे
बलशाली रावण का मेरे बच्चे क्या कर सकेंगे 7