Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 19, Verse 1

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण, सर्ग 19, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । विशिष्टांशसमर्थत्वमुपमानेषु गृह्यते । को भेदः सर्वसादृश्ये तूपमानोपमेययोः ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

प्रासंगिकता समर्थन कर उससे सम्बद्ध प्रमाणतत्त्व का निर्णय करने के इच्छुक श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामजी, जिस अंश का विशेषरूप से प्रतिपादन करने की विवक्षा हो, उसीसे सादृश्य सब उपमानों मे गृहीत होता है, उपमान और उपमेय मेँ सर्वथा सादृश्य होने पर उपमान और उपमेय में क्या अन्तर रहेगा ? भाव यह कि विशेष, अंश में ही सादृश्य गृहीत होता है, अन्यथा “गाय के समान गाय है" इत्यादि स्थान में जाति आदि से भी सादृश्य की विवक्षा होने पर भेद न होने से उपमानमात्र का उच्छेद हो जायेगा

सर्ग सन्दर्भ

अठारहर्वौँ सर्ग समाप्त उन्नीयवाँ सर्ग दृष्टान्त के अर्थनिरूपण के सिलसिले में नित्य अपरोक्ष द्रष्टा, दृश्य आदि के साक्षी ब्रह्मरूप प्रमाणतत्व का शोधन ।