Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 2, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण, सर्ग 2, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 2 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
ज्ञेयं यावन्न विज्ञातं तावत्तावन्न जायते ।
विषयेष्वरतिर्जन्तोर्मरुभूमौ लता यथा ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
वैराग्य, बोध ओर उपरति की अभिवृद्धि मे वैराग्य आदि परस्पर सहायक हैं, अतः ज्ञान के अतिशय
परिपाक से ही मूलोच्छेद होने के कारण आत्यन्तिक राग का नाश होता है, ऐसा कहते हैं।
जैसे मरूभूमि में लता नहीं उगती वैसे ही जब तक ज्ञातव्य तत्त्व का ज्ञान नहीं होता तब तक विषयों
में वैराग्य नहीं होता