Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 3, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण, सर्ग 3, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 3 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
कथयिष्यसि विस्तीर्णा भगवन्मोक्षसंहिताम् ।
इमं तावत्क्षणं जातं संशयं मे निवारय ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
इससे संप्रदायशुद्धि कही ।
इस प्रकार प्रतिज्ञापूर्वक अपने उपदेशश्रवण की ओर श्रीरामचन्द्रजी का ध्यान आकृष्ट
किया गया, मन में अन्य जिज्ञासा के रहने पर श्रीगुरु के उपदेश पर ध्यान नहीं रहेगा, अतः
सूचीकटाहन्याय से पहले उत्पन्न सन्देह की निवृत्ति के लिए प्रार्थना कर रहे श्रीरामचन्द्रजी ने
कहा : भगवन्, श्रीव्यासजी के अवशिष्ट लोगों के समान जीवभाव में दिखलाई देने से एवं
शुकदेवजी की मुक्ति सुनने से उत्पन्न हुए इस सन्देह को पहले क्षणभर में दूर कर दीजिये, इस
सन्देह की निवृत्ति के अनन्तर विस्तीर्ण मोक्षसंहिता को कहिएगा