Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 9, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण, सर्ग 9, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 9 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
भावी त्ववश्यमेवार्थः पुरुऽषार्थैकसाधनः ।
यः सोऽस्मिँल्लोकसंघाते दैवशब्देन कथ्यते ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्टजी वावाकि मत का प्रदर्शन करते है।
पुरुषप्रयत्न से होनेवाला जो अवश्य फल का भोग है, वही इस लोक में दैवशब्द से कहा
जाता हे