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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 1, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 1, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 1 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

बन्धोऽयं दृश्यसद्भावाद्दृश्याभावेन बन्धनम् । न संभवति दृश्यं तु यथेदं तच्छ्रणु क्रमात् ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि शंका हो कि मैं संसाररूप बन्धन की निवृत्ति का उपाय चाहता हूँ, मेरा दृश्य को मिथ्या सिद्ध करनेवाले इस उत्पत्ति प्रकरण को सुनने से क्या लाभ ? इस पर कहते हैं। हे श्रीरामजी, जब तक दृश्य है, तभी तक यह संसाररूप बन्धन हे दृश्य की निवृत्ति होने से बन्धन नहीं रह सकता। यह दृश्य जिस प्रकार उत्पन्न होता है, उसे आप क्रम से सुनिए