Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 10, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 10, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
आकारिणि यथा सौम्ये स्थितास्तोये महोर्मयः ।
अनाकृतौ तथा विश्वं स्थितं तत्सदृशं परे ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
आकाररहित ब्रह्मरूप से साकार जगत् की सत्ता कैसे है, ऐसी आशंका कर जैसे विभिन्न
आकारवाली लहरों की एकाकार जलरूपसे स्थिति है, वैसे ही साकार जगत् की निराकार
ब्रह्मरूपसे स्थिति में कोड विरोध नहीं है, इस अभिप्राय से कहते है ।
जैसे निश्चल (शान्त होने के कारण प्रसन्न) आकारवाले जल में चंचलाकार बड़ी लहरें
विद्यमान रहती हैं, वैसे ही आकाररहित ब्रह्म में यह विश्व निराकाररूप से स्थित हैं