Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 10, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 10, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
पूर्णात्पूर्णं प्रसरति यत्तत्पूर्णं निराकृति ।
ब्रह्मणो विश्वमाभातं तद्धि स्वार्थं विचक्षितम् ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार उपाधिभूत जगत् का कारण से अपृथक्त्व कहते है ।
जो पूर्ण ब्रह्म से ओपाधिक भेद द्वारा जीवरूप से उत्पन्न होता है, वह परमार्थत: पूर्ण ही है
ओर जो पूर्ण है, वह निराकार है, क्योकि साकार पूर्ण नहीं हो सकता