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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 100, Verse 19

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 100, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 100 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

व्याशब्दितं सर्वशक्तेस्तां शक्तिं ब्रह्मतां विदुः । मनः सत्तात्मकं नाम यथैतन्मनसि स्थितम् ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि कोई शंका करे कि काम आदि मनके धर्म हैं, वे ब्रह्ममे स्थित कैसे हो सकते हैं, जिससे कि वे ब्रह्मथक्ति कहे जाय 2 इस पर कहते है । जैसे मन का सत्तात्मक ब्रह्मरूप नाम संसर्गध्याससे मनमें स्थित है अथवा जैसे वसन्त आदि ऋतुओं की शक्त्यो वृक्ष आदि में स्थित हैं वैसे ही मनके धर्म भी ब्रह्म में स्थित हें