Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 102, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 102, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 102 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
कोऽसौ संकल्पितः केन क्षयो ब्रह्मविदां वर ।
असतैव महामोहं येनादात्तत्सदैव हि ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
क्षयसंकल्पात् (क्षीयते डति क्षयो नश्वरात्मा तत्संकल्पात् यानी नश्वरात्ाके संकल्प से)
इस हेतु क्वनमे संकल्प का कौन कर्ता हि ओर कौन कर्म है यह विशेषरूप से जानने की इच्छा
कर कहे श्रीरामचन्द्रजी पूछते है।
ब्रह्मवेत्ता ओं में सर्वश्रेष्ठ, संकल्पित नश्वरात्मा कौन हे ओर किसने उसका संकल्प किया ?
जिससे इस आत्मा ने बिना किसी कारण के संसारभरान्ति का ग्रहण किया हे