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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 102, Verse 24

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 102, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 102 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

मनोदेहो हि जन्तूनां देशकालतिरोहितः । मुहुर्मृतिपटाच्छन्नः शठे किं परिदेवना ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

जीवों का मनोमय शरीर देश और काल से तिरोहित है तथा मरण रूपी वस्त्र से बार-बार आच्छन्न रहता है । ठगनेवाले इस मनोमय देह के नष्ट होने पर क्या क्लेश ? यानी क्लेश करना उचित नहीं है