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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 102, Verse 26

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 102, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 102 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

अतस्त्वं वासनां राम मिथ्यैवाहमिति स्थिताम् । त्यज पक्षीश्वरो व्योमगमनोत्क इवाण्डकम् ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

इसलिए हे रामचन्द्रजी, जैसे आकाश में उड़ने के लिए उत्कण्ठित पक्षीका बच्चा, जिसके पंख जम गये हों, अपने आवरणरूप अण्डे के छिलके का त्याग करता है वैसे ही आप “अहम्‌* रूप से मिथ्या ही स्थित वासना का त्याग कीजिये